एमसीएलआर क्या है? निधि आधारित ऋण दर की सीमांत लागत (एमसीएलआर) के बारे में यहाँ पढ़ें

प्रिय पाठक,

आज हम एमसीएलआर पर एक लेख पेश कर रहे हैं। यह लेख आगामी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है और आपकी तैयारी में आपकी सहायता करेगा।

आधार दर क्या है?

एम.सी.एल.आर. दर के क्रियान्वन से पहले, ऋण के लिए ब्याज दर तय करने हेतु एक तरीका था। इस दर को आधार दर कहा जाता है। अब, सभी ऋण (कुछ को छोड़कर) एम.सी.एल.आर. (निधि आधारित ऋण दर की सीमांत लागत) पर आधारित हैं। इस पद्धति ने आधार दर प्रणाली को बदल दिया है।

इसलिए, यह समझना जरूरी है कि आधार दर प्रणाली क्या है और क्यों आर.बी.आई. ने इस आधार दर प्रणाली की बजाए  एम.सी.एल.आर. को अपनाया है।

आधार दर – यह बैंकों की ऋण दर है जिस दर से नीचे बैंकों को ऋण देने की अनुमति नहीं थी।

मान लीजिए कि बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक (बी.ओ.बी.) की आधार दर 7% है। तब बैंक कभी भी 7% से नीचे धन ऋण पर नहीं देगा। बैंक आधार दर के साथ वृद्धि दर जोड़ता है और यह ब्याज ग्राहक के ऋण पर निर्धारित होता है। यह वृद्धि वह ब्याज दर है जो आधार दर से अधिक और ऊपर होती है।

उदाहरण स्वरूप – यदि बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक (बी.ओ.बी.) की आधार दर 7% है और वृद्धि दर 0.25% है, तो आपको 7.25% ब्याज पर ऋण मिलेगा। इस प्रकार, आपके ऋण पर कोई ब्याज दर नहीं है, लेकिन आधार दर + वृद्धि दर है। ग्राहक के जोखिम प्रोफ़ाइल और ऋण अवधि जैसी कई चीजों पर वृद्धि दर आधारित होती है।

 एम.सी.एल.आर. की आवश्यकता क्यों पड़ी?

जब आर.बी.आई. रेपो दर को घटाता है, तो बैंकों को उनकी ऋण दरों और जमा दरों में आवधिक परिवर्तन करने की आवश्यकता होती है। लेकिन बैंक इसे बहुत देर से कार्यांवित करते हैं। इसका मतलब यह है कि जब आर.बी.आई. ने रेपो दर  में 10% की गिरावट की, तब बैंकों ने इसमें तुरन्त गिरावट नहीं की या उन्होंने कुछ महीनों के बाद रेपो दर में कमी की।

और जब आर.बी.आई. रेपो दर में वृद्धि करता है, तो बैंक तेजी से उसे कार्यांवित करते हैं और ब्याज के ऋण दर में वृद्धि करते हैं। हालांकि, आर.बी.आई. द्वारा ब्याज दर में कमी करने पर बैंक अपने ऋणों की ब्याज दर पर प्रतिक्रिया या उसे धीमी गति से कार्यांवित करते हैं।

इसलिए, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दर को कम करने के बाद बैंक अपने ग्राहकों से ऋण पर अधिक दर पर ब्याज लेता है।

इसलिए, इस तरह के सुधार आसन्न होते हैं, जहां रेपो रेट में बदलाव बैंक की जमा दरों और ऋण दरों में परिलक्षित होता है।

एम.सी.एल.आर. ऐसा मौद्रिक संचरण से करता है जिससे बैंक को एम.सी.एल.आर. की गणना करने से पहले रेपो रेट पर विचार करने की आवश्यकता होती है। मौद्रिक संचरण बैंकिंग प्रणाली द्वारा रेपो दर परिवर्तन को ब्याज दर परिवर्तन के प्रभावी मार्ग की ओर अग्रसर करता है।

इसका उद्देश्य है;

  • बैंकों की पॉलिसी दर के संचरण को ऋण दरों में सुधारना।
  • बैंकों द्वारा पहले से ही ब्याज दर निर्धारित करने के लिए कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना
  • उधारकर्ताओं के साथ साथ बैंकों के लिए उचित ब्याज दरों पर बैंक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना
  • बैंकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और अपने दीर्घकालिक मूल्य और आर्थिक विकास में योगदान को बढ़ावा देने में सक्षम बनाना।

एम.सी.एल.आर. – यह बैंक की न्यूनतम ब्याज दर है जिससे नीचे बैंक इसे ऋण नहीं दे सकता है।

हालांकि, आर.बी.आई. द्वारा अनुमति होने पर भी इसमें कुछ अपवाद हैं और इसमें सरकारी योजनाओं के तहत ऋण, व्यक्तिगत ऋण औऱ ऑटोमोबाइल ऋण शामिल हैं।

भविष्य के लिए ब्याज दरों को तय करने की यह विधि 1 अप्रैल 2016 से आर.बी.आई. द्वारा शुरू की गई थी और बैंक के लिए एक आंतरिक बेंचमार्क या संदर्भ दर के रूप में कार्य करती है जो कि सभी ऋणों के मूल्य निर्धारण में मदद करेगी।

एम.सी.एल.आर. के आधार पर, विभिन्न ग्राहकों के लिए ब्याज दर को उनके जोखिम के अनुसार तय किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि दीर्घकालिक ऋणों में जोखिम की उच्च संभावना है, तो उनके लिए उच्च ब्याज दर के साथ शुल्क लिया जाएगा। आधार दर अब एम.सी.एल.आर. गणना के आधार पर निर्धारित की जाती है।

रेपो दर और अन्य उधार दरों, जो आधार दर प्रणाली के तहत मान्य नहीं थे, जैसे कारकों पर विचार करके एम.सी.एल.आर. को मासिक रूप से संशोधित किया जाता है।

नई पद्धति बैंकों द्वारा उधार दर निर्धारित करते समय धन प्राप्त करने के लिए प्रदान की गई ब्याज दर में परिलक्षित सीमांत लागत का उपयोग करती है। इसमें जमा से ब्याज दर और आर.बी.आई. से ऋण लेना दोनों शामिल है। इसलिए, बैंक द्वारा जमाराशियों और रेपो दर के लिए ब्याज दर एम.सी.एल.आर. गणना में निर्णायक कारक है।

एम.सी.एल.आर. की गणना

अर्थशास्त्र में, सीमांत परिवर्तित स्थिति को संदर्भित करता है। एम.सी.एल.आर. बैंकों की गणना के लिए परिवर्तित परिस्थितियों पर विचार करने की आवश्यकता है। एम.सी.एल.आर. के विभिन्न कारक हैं, अर्थात्;

1. सी.आर.आर. खाते पर नकारात्मक होनाभारतीय रिज़र्व बैंक मे आरक्षित निधि रखने पर बैंकों पर यह लागत लगती है। बैंकों द्वारा सी.आर.आर. पर आर.बी.आई. द्वारा कोई ब्याज नहीं दिया जाता है और इसलिए इस तरह के निधियों में रखे गए धन की लागत ऋण पर लगाए गए ब्याज से मिलती है।

2. संचालन लागत: इसमें बैंकों द्वारा संचालित संचालन व्यय भी शामिल है।

3. टेनर प्रीमियमयह उच्चत्तम ब्याज है जिसे दीर्घकालिक ऋणों पर लगाया जा सकता है।

4. सीमांत लागत: सीमांत लागत एम.सी.एल.आर. का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। इसमें उधार लेने की सीमांत लागत और कुल संपत्ति पर लाभ शामिल है। भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार, निम्न कारकों के आधार पर सीमांत लागत लगाई जानी चाहिए:

  1.  बचत, चालू, सावधि जमा, विदेशी मुद्रा जमा आदि जैसे विभिन्न प्रकार के जमा के लिए ब्याज दर दी गई है।
  2. उधार – अल्पकालिक ब्याज दर (रेपो दर) या दीर्घकालिक ऋण दर।
  3. कुल संपत्ति पर लाभ – पूंजी पर्याप्तता मानदंडों के अनुसार

संक्षेप में, एम.सी.एल.आर. मुख्यतः निधि की सीमांत लागत जमा दर और रेपो दर से निर्धारित होता है। रेपो रेट के साथ कोई भी बदलाव सीमांत लागत से परिलक्षित होता है और इसलिए एम.सी.एल.आर. को भी बदला जाना चाहिए।

भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक, एम.सी.एल.आर. में वृद्धि के घटकों को जोड़कर वास्तविक ऋण दर को निर्धारित किया जाएगा। उधारकर्ता को जोखिम के आधार पर बैंकों द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि उच्च ब्याज दर है।

आर.बी.आई. के दिशानिर्देशों के मुताबिक, “बैंक पूर्व-घोषित तिथि पर हर महीने विभिन्न परिपक्वता की समीक्षा करेंगे और उनके एम.सी.एल.आर. को प्रकाशित करेंगे।” इस तरह के आवधिक संशोधन बैंकों को उस महीने आर.बी.आई. द्वारा किए गए किसी भी तरह के रेपो दर में बदलाव पर विचार करने के लिए मजबूर करेंगे।

कैसे एम.सी.एल.आर. आधार दर से अलग है?

नोटसी.आर.आर. लागत और संचालन व्यय आधार दर और एम.सी.एल.आर. दोनों के लिए सामान्य कारक हैं। लाभ का न्यूनतम दर कारक स्पष्ट रूप से एम.सी.एल.आर. के तहत बाहर रखा गया है।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

A WordPress.com Website.

Up ↑